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हिन्दूरत्न डॉ. प्रेमसुख सुराणा 'गुरुजी'* द्वारा उठाए गए *लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान*

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हिन्दूरत्न डॉ. प्रेमसुख सुराणा 'गुरुजी'* द्वारा उठाए गए *लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान*

*प्रेस विज्ञप्ति*  
*नई दिल्ली, 29 अप्रैल, 2026*  

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*विषय: लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान – केंद्रीय सरकार मौन तोड़े*  

*हिन्दूरत्न डॉ. प्रेमसुख सुराणा 'गुरुजी'* द्वारा उठाए गए *लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान* के प्रश्न पर *डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच* के *राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल जी* ने समर्थन व्यक्त किया।  

*बाबूजी का वक्तव्य:*  

_"गुरुजी डॉ. प्रेमसुख सुराणा जी की पीड़ा हर राष्ट्रभक्त की पीड़ा है।_  

*1. आपातकाल असंवैधानिक था:* 25 जून 1975 को लोकतंत्र का गला घोंटा गया। डेढ़ लाख निर्दोष देशभक्त बिना मुकदमे जेल में ठूंसे गए। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जिस लोकतंत्र के लिए बलिदान दिया, उसी लोकतंत्र को 1975 में बेड़ियों में जकड़ा गया। आज तक उसे 'असंवैधानिक' घोषित न करना इतिहास के साथ अन्याय है।  

*2. लोकतंत्र सेनानी = स्वतंत्रता सेनानी:* जिसने अंग्रेजों से लड़कर देश आजाद कराया, वो स्वतंत्रता सेनानी। जिसने इंदिरा की तानाशाही से लड़कर लोकतंत्र बचाया, वो लोकतंत्र सेनानी। दोनों का त्याग बराबर है। फिर सम्मान में भेदभाव क्यों? *Freedom Fighters Act* में लोकतंत्र सेनानियों को तत्काल शामिल किया जाए।  

*3. 15 हजार ही बचे हैं:* डेढ़ लाख में से आज सिर्फ 15 हजार जीवित हैं। रोज कोई न कोई 'लोकतंत्र का प्रहरी' भगवान को प्यारा हो रहा है। क्या सरकारें उनके ताबूत पर माला चढ़ाने का इंतजार कर रही हैं? सम्मान जीते जी होता है, श्राद्ध नहीं।  

*4. राजस्थान सहित 80% राज्य मौन:* वादा करके मुकर जाना लोकतंत्र का अपमान है। सम्मान राशि, चिकित्सा सुविधा, रेल यात्रा – जो अन्य राज्यों में मिल रहा है, वो सबको मिलना चाहिए। 'ढाक के तीन पात' वाली नीति अब नहीं चलेगी।  

*केंद्रीय सरकार से मंच की मांग:*  

1. *आपातकाल को आधिकारिक रूप से 'असंवैधानिक' घोषित करें।*  
2. *लोकतंत्र सेनानियों को 'स्वतंत्रता सेनानी' का दर्जा देकर पेंशन, चिकित्सा व यात्रा सुविधा एक समान करें।*  
3. *26 जून को 'लोकतंत्र बचाओ दिवस' राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाए।*  
4. *जीवित सेनानियों की सूची बनाकर 3 महीने में सम्मान समारोह आयोजित हो।*  

_यह एहसान नहीं, एहसास है। लोकतंत्र जिंदा है तो इन सेनानियों की बदौलत। सरकारें कुंभकरणी नींद से जागें। मौन तोड़ें – हां या ना, स्पष्ट करें। दूध का दूध, पानी का पानी हो जाए।_  

_गुरुजी कहते हैं – 'कौर गले में अटकता है'। मैं कहता हूं – जब तक अंतिम लोकतंत्र सेनानी को सम्मान नहीं मिलता, तब तक हर राष्ट्रभक्त का कौर अटकेगा।"_  

*जय हिंद | लोकतंत्र अमर रहे*  

*– बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल*  
*राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच*  
*जी 20/259, तीसरी मंजिल, नई दिल्ली*  
*91-9414402558 | dspmrvm@gmail.com*  

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*फॉरवर्ड मैसेज:*  
‼️ _लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान करो_ ‼️  
_आपातकाल को असंवैधानिक घोषित करो_  
_15 हजार ही बचे हैं – जीते जी सम्मान दो_  
_मौन तोड़ो सरकार_  
*– डॉ. प्रेमसुख सुराणा गुरुजी के साथ*  
*– बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल* 🚩

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